वो कैसे समझदार माँ बाप हो सकतें हैं। जो अपनी औलाद पैदा कर के छोड़ देते हैं।
बिना कोई परवरिश दिए या बिना किसी ज़िम्मेदारी को पूरी किए हुए।
अछम्य अपराध है ये ।
अगर वही औलाद जवानी मे इसका जवाब उनका तिरस्कार कर के दे तो ?
हमारी मजबूरी थी, हम समझ नही पाए का नाम लेकर रो दतें हैं।
सिर्फ बड़ों को हो गलती कोई मजबूरी नही है
गलती सिर्फ औलाद करे ये भी कोई ज़रूरी नही है
इन दोनों के बीच का फर्क करना ही सच्चा ज्ञान है
कौन सही है और कौन गलत हर इंसान ये समझता है
सही तालीम और अच्छा जीवन देना माँ बाप का फ़र्ज़ हैं, और बुढ़ापे मे उनकी ज़िम्मेदारी उठाना बच्चों का फ़र्ज़ हैं अन्यथा ये दोनों एक जुर्म है
क्योंकि जो अपराधी समाज से निकल कर आते है
वो भी किसी माँ बाप की खोख से निकल कर आतें हैं |