सोमवार, 18 नवंबर 2013

प्यार

फूलों से नही
बहारों से प्यार करना
और अपनो से नही
अपने किसी सपने से प्यार करना
क्योंकि अपने एक दिन
कहीं छोड़ चले जाएँगे
और फूल बावक़्त
मुरझा के मर जाएँगे
तब बस रहेगी अपनी हस्ती
और जलेगी पूरी की पूरी बस्ती


रविवार, 17 नवंबर 2013

मा बाप देखने के लिए


एक आयना ही काफ़ी हैं
अपनी औकात देखने के लिए|
यहाँ हफ्ते  निकल जाते हैं
तेरा साथ देखने के लए |
मुसीबत मे हूँ
शहर की आबो हवा ही खराब हैं 
मेरे कई साल निकल जाते हैं
मा बाप देखने के लिए|

लड़ती रही एक लौ

लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...