इस कदर परेशां रहने लगा हूँ
भीड़ मैं तनहा रहने लगा हूँ
करता था कभी उगते सूरज को सलाम
अब तो डूबते को भी करने लगा हूँ
डरता था अक्सर मौत से कभी
आज ज़िन्दगी से भी डरने लगा हूँ
भीड़ मैं तनहा रहने लगा हूँ
करता था कभी उगते सूरज को सलाम
अब तो डूबते को भी करने लगा हूँ
डरता था अक्सर मौत से कभी
आज ज़िन्दगी से भी डरने लगा हूँ






























