शुक्रवार, 24 जून 2011

मुझे थोड़ी साँसे दे दो,मुझे थोड़ी इज्जत दे दो.......

एक दिन यूँ ही भटक रही थी जिंदगी
की अचानक उसे पंख मिले
और उसे लगा कर वो उड़ पड़ी 
मस्जिद पर से उडी और मंदिर पर से भी उडी 
उडती गयी उडती गयी
मयखानों को चूमा दवाखानों को दस्तक दी
थोड़ी गरीब नवाजी भी की और थोड़ा इश्क भी किया
सरहद पर ज्यों ही पहुंची परेशान सी हो गयी
कुछ लाशों को देखा और गोलियों की आवाज़ भी  सुनी 
देखा एक औरत खून से लथपथ रो रही थी
पूछा उस से कौन हो तुम
कहा मोहब्बत हूँ मैं और जो बगल में लाशें हैं
एक अमन और दूसरी शान्ति की है
मेरे दो बच्चे
मेरी आबरू लुट ली गयी
और मेरे बच्चों को गोली मार दी गयी
जीना हैं मुझे कुछ रोज और 
मुझे थोड़ी साँसे दे दो,मुझे थोड़ी इज्जत दे दो








 





मंगलवार, 21 जून 2011

वो मेरे लिए सबसे महँगी शराब लाएगी.........

करीब आ कर मुझे होठों से लगाएगी 
सिगरेट को मेरे बड़े प्यार से जलायेगी 
धुआं जो होगा वो उसमे खो जायेगी 
वो मेरे लिए सबसे महँगी शराब लाएगी 
थोड़ा खुद पीयेगी थोड़ा मुझे पिलाएगी 
फिर गोद में लेट कर 
मोहब्बत के गीत गुनगुनायेगी
आहिस्ता आहिस्ता मेरे आगोश में समा जायेगी 
मौत तू एक दिन जरूर आएगी........... 





अजीब सा रिश्ता बनाती है वो........

अजीब सा रिश्ता बनाती है वो 
कभी सहम सी जाती है
कभी बेख़ौफ़ हो जाती है
कभी तो बिस्तर से उठने ही नहीं देती
और कभी किसी के साथ भी लेट जाती है
जिन्दगी ये बता क्या मुझे रोज आजमाती है तू  .........


सोमवार, 13 जून 2011

इस उम्र मैं रिश्ते नहीं फ़रिश्ते आतें हैं



सारी याद ताजा हैं वो आज भी मेरी ख्वाबों मे आतीं है 
अचानक मुलाकात हो उनसे तो वो शर्मा जाती है
वो अपने दिल  के  कोने से  कुछ  कहती हैं ,
मैंने भी बेमन से उसे अनसुना कर देता हूँ
वो  मेरे सोए जस्बात को जगा देती मैं  फिर  उन्हें  गहरी  नींद  मैं   सुला  देता
वो  हर रोज  नया  रिश्ता बनाती मैं  एक  पुराना  रिश्ता मिटा देता
वो  पूछती  क्या  अब  भी  तुम्हे रिश्ते आते  हैं
मैं  कहता  इस  उम्र  मैं  रिश्ते नहीं  फ़रिश्ते  आतें  हैं 

शनिवार, 11 जून 2011

मैं और मेरी कमीनी जिंदगी ........

वो मुफलिसी का दौर था 
नियति कही अन्दर गहराई में दफन थी 
कभी कभी दिल बहलाने के लिए
जिन्दगी से गुफ्तगू  किया करता था 
मैं कहता था तारे तोड़ना है.
वो मुस्कुराते हुए कहती
पैसे ही तोड़ लाओ बहुत है 
मैं बेशर्म सा हँस देता था
लेकिन फक्र  भी होता था
बिना जेब वाले कपड़ों को देख कर
फटे नोट को फेक कर मिली
एक मात्र ख़ुशी को 
वो फिर से हाथ में थमा कर छीन लेती थी 
और हँसते हुए कहती लो बीड़ी खरीद लेना 
तब मैं एक बनावटी गुस्सा दिखा कर 
उसके बाल खींचता
वो चीखते हुए कहती 
जेब वाले कपडे कब पहनोगे 
मैं कहता 
जब पैसे  पेड़ पर उगेंगे  
वो कहती बेशर्म कही का 
मैं कहता कमीनी ज़िन्दगी
 











    
 













                   

गुरुवार, 9 जून 2011

आदमी पुराना हैं

कोई भी हो अड़चन झट से दूर कर जाता हैं
मेरा हमदम हैं मुश्किलो से नहीं घबराता हैं
ज़रुरत हो दिल की जो जान भी ले आता हैं
आदमी पुराना हैं हर वक़्त काम आता हैं

बुधवार, 8 जून 2011

रोटी कपडा और माकन ही गायब है इस वतन से



करतें  हैं  रहनुमा  जो  इंतजाम  बड़े  जतन  से
मिलतें  हैं  वो  भी  हमें  बड़े  सितम  से
कोई  पूछे  आकर  इस  देश  की  हालत  क्या है
रोटी  कपडा  और  माकन  ही  गायब  है  इस  वतन  से

गुरुवार, 2 जून 2011

दिलों से सभी को जोड़ता हूँ मैं

नहीं चाहिए पैसा ऐसा बोलता हूँ मैं

और पैसो से ही सबको तोलता हूँ मैं

मुफलिसी और गरीबी  सब मेरे साथ हैं

वक़्त आने पर  इनको छोडता हूँ मैं

नए रिश्तें मुझको मिले इस कदर

पुराने रिश्तो को तोड़ता  हूँ मैं

पुराने नए सारे पुल गिर गए

दिलों से सभी को जोड़ता हूँ मैं

खुश ही तो था जब मैं बच्चा था




घर ही न बनाते तो अच्छा था , 
किसी भी राह मैं सो जाते तो अच्छा था , 
बड़े होने की जिद में कहीं खो गया
खुश ही तो था जब मैं बच्चा था

बुधवार, 1 जून 2011

अरे हम खुदा हैं



कट भी गए मेरे हाथ तो फिर से उग आयेंगे ,
अरे हम खुदा हैं ,अब ये भी क्या तुम्हें फ़रिश्ते आकर बताएँगे ----शामिल

लड़ती रही एक लौ

लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...