बुधवार, 24 जून 2020

लड़ती रही एक लौ

लड़ती रही एक लौ अँधेरे से
ये सोच कर की मैं सही हूँ
रह रह कर वो देती एक चुनौती
और बीच बीच में वो
खिड़की के बहार देखती
की आ जाये कोई मसीहा
हौसला आफजाई को
की तभी अचानक
कही जोर से आया एक हवा का झोका
लौ का साथ देने को
और फिर एक लम्बी ख़ामोशी छा गयी
हवा दरवाजे से बहार निकल गयी
और लौ ने तड़पते हुए
अँधेरे के सामने दम तोड़ दिया








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लड़ती रही एक लौ

लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...