उकता गए हैं तुझसे ए ज़िन्दगी
वाकई में हम
फिजा में रंग नहीं
ज़ीने का ढंग नहीं
भीड़ में धँसता आदमी
दौलत में फंसता आदमी
उकता गए हैं तुझसे ए ज़िन्दगी
वाकई में हम
तपेदिक से मरता हुआ
एड्स से डरता हुआ
सहमा हुआ, डरा हुआ
भक्क सा दिखता हुआ
उकता गए हैं तुझसे ए ज़िन्दगी
वाकई में हम
वाकई में हम
फिजा में रंग नहीं
ज़ीने का ढंग नहीं
भीड़ में धँसता आदमी
दौलत में फंसता आदमी
उकता गए हैं तुझसे ए ज़िन्दगी
वाकई में हम
तपेदिक से मरता हुआ
एड्स से डरता हुआ
सहमा हुआ, डरा हुआ
भक्क सा दिखता हुआ
उकता गए हैं तुझसे ए ज़िन्दगी
वाकई में हम