सोमवार, 30 अप्रैल 2012

शराब

एक तवायफ की तरह प्यार जताती हैं शराब
मयखाने में नहीं तो घर में बुलाती हैं शराब
जो रूठ जाओ तो फिर खुद मानती हैं शराब
चिलमन से खुद को छुपाती हैं शराब
इश्क खुदा हैं तो इश्क-ए-जुदाई हैं शराब
मेरे हर गम का अब इलाज हैं शराब
लोग कहतें हैं मुझे छोड़ दो शराब
भला आसानी से कभी छोड़ी जाती हैं शराब

शनिवार, 28 अप्रैल 2012

तुम्हे याद नहीं आती

तुम्हे याद नहीं आती इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं
तनहा हूँ मैं शायद आजकल या मुझे कोई मिलती नहीं

कुछ तर्जुबा तुमको भी हैं ज़िन्दगी का
कुछ तर्जुबा हमको भी हैं ज़िन्दगी का
आओ इन तर्जुबों को मिला ले
फिर तुम भी तजुर्बेकार और हम भी तजुर्बेकार

फकत मजाक की उम्र मैं हम गंभीर रहे
आज हम मजाक में हैं और ज़माना गंभीर हैं

जुलम हो गया मुझसे जुलम होते होते
खुदा कह गया खुद को में रोते रोते

गलती तुम्हारी भी थी और मेरा भी कसूर था
मिल न सके तुमसे हम जाते जाते
हमें क्या पता था येः दुनिया का दस्तूर था






लड़ती रही एक लौ

लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...