शनिवार, 13 अगस्त 2011
शुक्रवार, 12 अगस्त 2011
दौलत नहीं लायेंगे
हमने भी पैसे कमाए थे
किसी अपने पर ही उडाये थे
मुह्हबत थी किसी से
इसीलिए चम्पी करवाए थे
वो खाली न बैठें कभी
इसीलिए कपडे भी धुलवाए थे
यकीन नहीं था की वो अनजान कुछ समझ न पायेंगे
मेरी मोह्हबत को भी वो अहसान का कारोबार बताएँगे
अब कुछ हम भी कर के दिखायेंगे
दोस्ती के बीच में कभी ये दौलत नहीं लायेंगे
किसी अपने पर ही उडाये थे
मुह्हबत थी किसी से
इसीलिए चम्पी करवाए थे
वो खाली न बैठें कभी
इसीलिए कपडे भी धुलवाए थे
यकीन नहीं था की वो अनजान कुछ समझ न पायेंगे
मेरी मोह्हबत को भी वो अहसान का कारोबार बताएँगे
अब कुछ हम भी कर के दिखायेंगे
दोस्ती के बीच में कभी ये दौलत नहीं लायेंगे
गुरुवार, 11 अगस्त 2011
आज मेहमान हो गए हैं
कभी दर्द बांटा करते थे आज दर्द की दुकान हो गए हैं
कल तक मालिक थे अपने घर के आज मेहमान हो गए हैं
कल तक मालिक थे अपने घर के आज मेहमान हो गए हैं
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
लड़ती रही एक लौ
लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...
-
दो दिन पहले ही मैंने अपनी टिकट करवाई थी | आबू-रोड मे माँ का ऑपरेशन होना था ,आज होली का दिन था १० बज चुके थे मैं निकला स्टेशन क लिए मगर आज...
-
वो मुफलिसी का दौर था नियति कही अन्दर गहराई में दफन थी कभी कभी दिल बहलाने के लिए जिन्दगी से गुफ्तगू किया करता था मैं कहता था तारे तोड़ना ...
-
हमी थे वो शक्श जिसने मंदिर में नमाज पढ़ी थी हमी थे वो शक्श जिसने मज्जिद में पूजा की थी बेशक न रिवाज हो ये दुनिया का जिससे मैं वाकिफ नहीं ...

