शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

मेरी तन्हाई पर रोने वालों तुम्हारा धन्यवाद


शायद तुम्हे तन्हाई ने बहुत रुलाया हैं
मगर मुझे जीने का ख्याल
इसी तन्हाई से ही आया हैं
शायद तुम्हे इसका साथ गवारा नहीं
मगर मुझे इससे प्यारा कोई नहीं
मैंने इंसानों को साथ छोड़ा हैं
मगर तन्हाई का नहीं
ये बात तुम्हे मै कैसे बताऊ
और कैसे अब तुम्हारे संग ये पल बिताऊं
जब तुम न होगे तो ये तन्हाई ही होगी
तुम्हारी कमी इस तन्हाई को बताऊंगा
गर छिन गयी ये तन्हाई
तो फिर क्या करेंगे हम
इस बेरहम दुनिया में
ज़ी न सकेंगे हम
मेरी तन्हाई पर रोने वालों तुम्हारा धन्यवाद

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