मंगलवार, 29 मार्च 2011

बेटी की बिदाई अच्छी लगी


कहतें हैं भारत में रोटी के बाद सबसे बड़ी समस्या बेटी की है .दोस्त की शादी में लखनऊ गया था.मुझे देखकर वो प्रसन्न हो गया अपने गले मिला फिर रिश्तेदारों से परिचय कराया.जल्दी से तैयार हो कर मैं उसकी बरात में शामिल हो गया फिर वही नाच गाना और पटाखे .शीला की जवानी और मुन्नी बदनाम .मैंने भी अनमने ढंग से थोड़ी कमर हिला दी.फिर लड़की के घर पहुंचा वहां काफी गर्मजोशी से स्वागत हुआ मैं सबसे पेहले जा कर लड़की के पिता से मिला . मुझे पिता बहुत पसंद हैं और मुझे उनसे गुफ्तगू करने में काफी मजा आता है . "नमस्ते अंकल " मैंने कहा उन्होंने जितना हो सका उतना सर झुका कर मेरा अभिवादन किया.शायद वो जिन्दगी में कभी इतना नहीं झुके होंगे .मुझे अचानक दुष्यंत कुमार की पक्तियां याद गयी | "ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा " | पूरी रात मैं उस पिता की झुका ही हुआ पाया.और दोस्त का पिता वो तो ऐसे छाती चौड़ी कर के घूम रहा था जैसे आज उसे सरकार बनाने का न्योता मिला हो .लड़की का पिता रह रह के सबसे हाल चाल पूछ रहा था.उसके चेहरे पे चिंता और तसल्ली दोनों भाव दिख रहे थे.लड़की की माँ और साहेलिया द्ल्हे राजा को बस निहार रही थी | थोड़ी छेड़खानी भी चल रही थी ,थोडा मौका मिलने पे मैं लड़की के पिता से बात करने चला गया. "एक बहुत बड़ा बोझ हल्का हो रहा है बेटा " .एक लम्बी सांस लेकर उन्होंने कहा| उसके पैदा होने के बाद ही मैंने पाई पाई जोड़ना शुरु कर दिया था.ऊफ अब थोड़ी तसल्ली मिल रही है ,मैं जरा चौंका."बिटिया के जाने का कोई दुःख तो हो रहा होगा अंकल " वो थोडा झेंप गए मैंने शायद उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था ."अब हाँ आआआआ ..थोड़ा दुःख तो होता है बेटा इन्ही हाथों ने उसे पाल पोष के बड़ा किया है" आप तो बिलकुल हिंदी फिल्मों के बाप के डायलौग मार रहे हैं " मैंने कोल्ड ड्रिंक उनकी तरफ बढाते हुए कहा .उनके चेहरे पे एक अजीब सा भाव गया जैसे कह रहे हो "क्यों परेशान कर रहे हो बेटा" 'खाना खा लिया तुमने .?....'उन्होंने पूछा "हाँ अंकल. तो जाओ एन्जॉय करो और वहां से निकल गएँ.मैं हल्का सा मन ही मन मुकुराया उफ्फ्फ एक और बाप को दुखी किया मैंने मेरे सवाल अक्सर बापों को दुखी करते हैं .

फिर
कन्यादान का समय आया. पिता एकदम जल्दी जल्दी सब काम निपटा रहे थे जैसे की सोचा रहे हों जल्दी से सब ख़त्म हो और कल से चैन की जिंदगी जियूँगा .मैं इनके पीछे जा के खड़ा हो गया |उन्होंने मुझे घुरा .शायद हिंदी फिल्म के बाप वाली बात याद गयी हो . और फिर मूह से बियर की बदबू भी तो रही थी,खैर रसम पूरी होते होते सुबह हो गयी ओर बिदाई का वक़्त आ गया पिता ने अपनी बेटी को गले से लगाया ओर कहा "अच्छे से रहना ससुराल में " पाँव छूकर बेटी न हाँ में जवाब दिया माँ भी फूट फूट कर रो रही थी | लड़के ने तपाक से लड़की का हाथ पकड़ा और बिना पीछे मुड़े कार मैं बैठ गया | वे लोग घर को चल दिए,कुछ देरतक सब उनको निहार रहे थे और फिर एक लम्बी ख़ामोशी छा गयी |पिता ने माँ से कहा घर चलें अब तो लड़की भी बिदा हो गयी | माँ ने भी हाँ में हाँ मिलाई पिता का उदास चहेरा फिर से खिल उठा मैंने उनसे पुछा अभी तो अंकल आप रो रहे थे और अचानक खुश हो गए बात क्या हैं | "वो तो सब फूट फूट कर रो रहे थे तो में भी रोने लगा, वर्ना मुझे बेटी की रुखसती अच्छी लगी" | "चलो कोल्ड ड्रिंक पीते हैं बेटा" उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा ....

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