एक दिन यूँ ही भटक रही थी जिंदगीकी अचानक उसे पंख मिले
और उसे लगा कर वो उड़ पड़ी
मस्जिद पर से उडी और मंदिर पर से भी उडी
उडती गयी उडती गयी
मयखानों को चूमा दवाखानों को दस्तक दी
थोड़ी गरीब नवाजी भी की और थोड़ा इश्क भी किया
सरहद पर ज्यों ही पहुंची परेशान सी हो गयी
कुछ लाशों को देखा और गोलियों की आवाज़ भी सुनी
देखा एक औरत खून से लथपथ रो रही थी
पूछा उस से कौन हो तुम
कहा मोहब्बत हूँ मैं और जो बगल में लाशें हैं
एक अमन और दूसरी शान्ति की है
मेरे दो बच्चे
मेरी आबरू लुट ली गयी
और मेरे बच्चों को गोली मार दी गयी
जीना हैं मुझे कुछ रोज और
मुझे थोड़ी साँसे दे दो,मुझे थोड़ी इज्जत दे दो
Class Mere Bhai . MAsterpiece hai.
जवाब देंहटाएं