सोमवार, 19 मार्च 2012

काश हमारा भी परिवार होता


काश हमारा भी परिवार होता
जिसे बेइन्तेहाँ हमसे प्यार होता
न खो जातें इस भीड़ में तन्हा अकेले
किसी को तो हमारे आने का इंतज़ार होता
काश हमारा भी परिवार होता.....
निगाहें ढूंढती हर आहट पर हमको
बाप भी दरवाजे पर आँख जमाये होता
कोई गर्म खाना बना कर रखता
कोई साथ खाने को बेक़रार होता
काश हमारा भी परिवार होता.....
किसी से शिकवा किसी से करार होता
तिवारी भी यारों का यार होता
महफ़िलें सजती उन्ही द्वारों में
जहाँ पर अपना परिवार होता
काश ......

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