एक आयना ही काफ़ी हैं
अपनी औकात देखने के लिए|
यहाँ हफ्ते
निकल जाते हैं
तेरा साथ देखने के लए |
मुसीबत मे हूँ
शहर की आबो हवा ही खराब हैं
मेरे कई साल निकल जाते हैं
मा बाप देखने के लिए|
लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...
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