फूलों से नही
बहारों से प्यार करना
और अपनो से नही
अपने किसी सपने से प्यार करना
क्योंकि अपने एक दिन
कहीं छोड़ चले जाएँगे
और फूल बावक़्त
मुरझा के मर जाएँगे
तब बस रहेगी अपनी हस्ती
और जलेगी पूरी की पूरी बस्ती
बहारों से प्यार करना
और अपनो से नही
अपने किसी सपने से प्यार करना
क्योंकि अपने एक दिन
कहीं छोड़ चले जाएँगे
और फूल बावक़्त
मुरझा के मर जाएँगे
तब बस रहेगी अपनी हस्ती
और जलेगी पूरी की पूरी बस्ती
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