तूने ज़िन्दगी भर दौलत कमाई हैं
मैंने ज़िन्दगी भर दौलत लुटाई हैं
तूने दौलत से मुह्हबत खरीदी हैं
मैंने खुद्दारी मैं मुह्हबत गवाई हैं
मैंने ज़िन्दगी भर दौलत लुटाई हैं
तूने दौलत से मुह्हबत खरीदी हैं
मैंने खुद्दारी मैं मुह्हबत गवाई हैं
लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...
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