मैंने उससे शादी का प्रस्ताव रखा , उसने तुरंत हाँ कर दिया फिर मैंने उससे कुंडली का मिलन किया हमारे सिर्फ १२ ही गुण मिल रहे थे , ये बात मैंने उसे बताई और कहा एक कुंडली की वजह से सपनो की मौत हो रही हैं उसने कुछ नहीं कहा फिर मैंने घरवालों से बात कही उनको सब मंज़ूर था कुंडली का दोष वो दूर करवाने के लिए तैयार थे मगर अंतरजातीय विवाह के खिलाफ थे l ये बात मैंने उसे भी बताई उसने कहा आप क्या सोचतें हैं ये बताओ l
मैंने कहा मुश्किल हैं घरवालों के खिलाफ जाना, कुछ देर खामोश रहने के बाद उसने कहा की हमारा रिश्ता अगर आगे नहीं बढ़ता तो कोई बात नहीं मगर आप मुझसे दूर मत जाना क्योंकि मैं आपसे प्यार करने लगी हूँ l
मैं स्तब्थ रह गया, मैंने कहा अभी हमे दो दिन ही हुए हैं मिले हुए और तुम्हे प्यार हो गया, उसने कहा इससे पहले कितने ही लोग मिले हैं मुझसे मगर सब दोस्ती फिर प्यार और फिर शादी का ख्याल रखतें हैं मगर आपने पहले शादी का प्रस्ताव रखा, अच्छा लगा जानकर l
मैंने कहा अब शादी तो नहीं हो सकती अगर तुम नहीं चाहती तो हम बात करना छोड़ देतें हैं, नहीं तो बाद मे तुमको ही दिक्कत होगी l मुझे हालाकि तुमसे प्यार नहीं ,मगर फिर भी मैं तुमरा दिल नहीं तोडना चाहता हूँ जब तुम चाहो मुझे कह देना, मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से चला जाऊंगा l कुछ ही दिनों में हम अच्छे दोस्त हो गए रोज बातचीत का सिलसिला चलता रहा l एक दिन फिर उसने अचानक कहा अब भी तुमको मुझसे प्यार नहीं हुआ l
मैंने कहा मैं आज भी तुम्हारे जज्बातों की कद्र करता हूँ मगर मुझे ऐसा कोई अहसास नहीं हो रहा है, मुझसे बिछड़ने के बाद तुम्हे तकलीफ न हो इससे बेहतर है की हम मिलना छोड़ दे l
बार बार छोड़ने की धमकी क्यों देतें हो ऐसा कहकर वो चली गयी l मैं भी चला आया |
मैंने कहा मुश्किल हैं घरवालों के खिलाफ जाना, कुछ देर खामोश रहने के बाद उसने कहा की हमारा रिश्ता अगर आगे नहीं बढ़ता तो कोई बात नहीं मगर आप मुझसे दूर मत जाना क्योंकि मैं आपसे प्यार करने लगी हूँ l
मैं स्तब्थ रह गया, मैंने कहा अभी हमे दो दिन ही हुए हैं मिले हुए और तुम्हे प्यार हो गया, उसने कहा इससे पहले कितने ही लोग मिले हैं मुझसे मगर सब दोस्ती फिर प्यार और फिर शादी का ख्याल रखतें हैं मगर आपने पहले शादी का प्रस्ताव रखा, अच्छा लगा जानकर l
मैंने कहा अब शादी तो नहीं हो सकती अगर तुम नहीं चाहती तो हम बात करना छोड़ देतें हैं, नहीं तो बाद मे तुमको ही दिक्कत होगी l मुझे हालाकि तुमसे प्यार नहीं ,मगर फिर भी मैं तुमरा दिल नहीं तोडना चाहता हूँ जब तुम चाहो मुझे कह देना, मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से चला जाऊंगा l कुछ ही दिनों में हम अच्छे दोस्त हो गए रोज बातचीत का सिलसिला चलता रहा l एक दिन फिर उसने अचानक कहा अब भी तुमको मुझसे प्यार नहीं हुआ l
मैंने कहा मैं आज भी तुम्हारे जज्बातों की कद्र करता हूँ मगर मुझे ऐसा कोई अहसास नहीं हो रहा है, मुझसे बिछड़ने के बाद तुम्हे तकलीफ न हो इससे बेहतर है की हम मिलना छोड़ दे l
बार बार छोड़ने की धमकी क्यों देतें हो ऐसा कहकर वो चली गयी l मैं भी चला आया |
मैंने उसे शादी की बधाई देतें हुए कहा की जिससे तुम्हारी शादी होगी वो बहुत ही किस्मत का धनि होगा जो तुम्हारी जैसी लड़की उसे मिल रही है l शादी से पहले वो मुझसे मिलना चाहती थी एक बार, मैंने हाँ कर दी अगले दिन हम मिले घंटों तक बात चली मैंने उससे पूछा लड़का देखने मे कैसा हैं उसने कहा मैंने उसे देखा नहीं हैं घर वालों ने बताया की देखने मे सुन्दर है मैंने कहा कुछ बातचीत तो हुई होगी उसने कहा घरवालों ने की हैं | उन्हें वो अच्छा लगा मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा मैंने कहा बिना देखे और बात किए तुम कैसे हाँ कर सकती हो उसने कहा आपको तो देखा भी था और बात भी की थी क्या फायदा हुआ मेरे पास कोई शब्द ही नही थे मैंने उससे कहा आज के बाद हम कभी नहीं मिलेंगे हमारी कहानी बस यहीं तक थी मैं नहीं चाहता की शादी के बाद मेरे नाम से कोई फसाद खड़ा हो ऐसा कहकर मैं चला गया , सुनने मे आया की कुछ ही दिनों मे उसकी शादी हो गयी मैं उसके लिए बहुत खुश था क्योंकि इतने दिनों मे वो मेरी बहुत अज़ीज़ दोस्त हो गयी थी |
इतने दिनों तक हम साथ मे थे मुझे कभी उसकी कमी नहीं खली लेकिन ये ख्याल आते ही अब शादी के बाद तो वो मुझसे बिलकुल ही नहीं मिलेगी मन अशांत सा हो गया अकेलापन मुझे सताने लगा हर पल उसी का ख्याल आने लगा जैसे मेरा दिल और दिमाग आपस मे लड़ने लगे . एक बाप बेटे की तरह और आज मेरा दिमाग फिर अपनी तर्कशक्ति पर फक्र मनाता हुआ दिल पर हंस रहा था | एक बार फिर जज्बातों ने उसूलों के आगे घुटने टेक दिए हैं, दिल सिर्फ ये कहता हुआ शांत हो गया की मैंने उसूल निभाए हैं जज्बातों की जगह उससे मिलने से पहले मैंने कुछ उसूल बनाए थे जिसे मानना मेरे दिल को नितांत ज़रूरी था वो उसूल मेरे दिमाग का बनाया हुआ था की " मैं इकरार कैसे करता मैंने इजाजत ही नहीं दी थी दिल को प्यार करने की " और दिल एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह अपने पिता की हर बात की तरह इस बात को भी मान गया | आज जीत दिमाग की हुई हैं मगर उस प्यार का क्या जो आज भी मेरे और उसके अंदर उमड़ रहा है मगर दुनिया की किसी भी किताब के अन्दर इस रिश्ते का कोई नाम नहीं हैं मुझे शब्दों की ज़रुरत हैं इस प्यार को रिश्ते का नाम चाहिए |
किसीने रिश्ते का उपहार देकर चाहत को पा लिया ,
हम प्यार करतें हुए भी रिश्ता नहीं बना सकेे l

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