जो था मेरे अन्दर कल तक एक इंसानी जस्बात
आज उसे कौमी बनाया गया
इस तरह नफरत भर दी जेहन में मेरे
की हर शक्श में मुझे हिन्दू मुस्लमान नज़र आ गया
वर्ण जाती अपने पराये से अनजान था मैं
मुझे उसी जाती वर्ण का सदस्य बनाया गया
देकर सत्ता का गुरुर मुझको मचलाया गया
मेरे ही द्वारा हर छोटे को पाँव तले कुचलवाया गया
खुश था मैं अपने आस्तित्व से मगर
खुदा का दर्जा देकर मुझे मंदिरों मस्जिदों में बैठाया गया

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