सोमवार, 4 जुलाई 2011

आज उसे कौमी बनाया गया

मेरे पंखो को काट मुझे हवा में उड़ाया गया 
जो था मेरे अन्दर कल तक एक इंसानी जस्बात 
आज उसे कौमी बनाया गया  
इस तरह नफरत भर दी जेहन में मेरे
की हर शक्श में मुझे हिन्दू मुस्लमान नज़र आ गया 
वर्ण जाती अपने पराये से अनजान था मैं
मुझे उसी जाती वर्ण का सदस्य बनाया गया 
देकर सत्ता का गुरुर मुझको मचलाया गया 
मेरे ही द्वारा हर छोटे को पाँव तले कुचलवाया गया
खुश था मैं अपने आस्तित्व से मगर 
खुदा का दर्जा देकर मुझे मंदिरों मस्जिदों में बैठाया गया






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