हर पल का हिसाब माँगा उसने
हर पल का हिसाब दिया मैंने
हर एहसान का हिसाब माँगा उसने
हर एहसान का हिसाब दिया मैंने
ताउम्र वो मांगते ही गए
ताउम्र हम देते ही गए
इस लेन-देन के खेल में
कुछ मैं उससे कटता रहा
आज मेरी एक पहचान हैं
और वो एक गुमनाम सा हैं
हर पल का हिसाब दिया मैंने
हर एहसान का हिसाब माँगा उसने
हर एहसान का हिसाब दिया मैंने
ताउम्र वो मांगते ही गए
ताउम्र हम देते ही गए
इस लेन-देन के खेल में
वक़्त यूँ ही बढ़ता रहा
कुछ वो मुझसे कटता रहा कुछ मैं उससे कटता रहा
आज मेरी एक पहचान हैं
और वो एक गुमनाम सा हैं
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें