मंगलवार, 27 सितंबर 2011

ज़िंदगी



मेरी हर बात पे कहकहे लगाती ज़िन्दगी
कभी हंशाती तो कभी रुलाती ज़िंदगी
एक कठपुतली की तरह नचाती ज़िंदगी
गरीबी में पली एक अमीर ज़िंदगी
मेरे ख्वाबों ख्यालों की ज़िंदगी
एक परेशान बेजुबान सी ज़िंदगी 
शमशान की ओर ले जाती ज़िन्दगी
मौत से रूबरू कराती ज़िन्दगी
आवारा बदचलन ज़िंदगी
एक जवानों की बुजुर्ग ज़िंदगी
हर बात पे पेहरा  लगती ज़िंदगी
बदहवाश बेबाक ज़िंदगी
मौत के करीब ज़िंदगी को तरसती ज़िंदगी 


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