गुरुवार, 29 सितंबर 2011



 ये लोग
आदम  और हव्वा के वंशज ये लोग
किस्मत के बरूखी के मारे ये लोग
मिटटी के शेर कहलाते ये लोग
अपनी औकात को छुपाते ये लोग
हर बात पे सवाल उठाते ये लोग
सच्चाई से मुह फेरते ये लोग
अपनी ही कब्र में दफ़न ये लोग
आँखों से न देख पाते ये लोग
कानो से न सुन पाते ये लोग
खुदगरजी के बोझ तले ये लोग
लोगों की भीड़ में खुद को खोजते ये लोग
इंसानियत को तरसते ये इंसानी लोग
अगर यही लोग हँ तो अफ़सोस हैं ये लोग




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