सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
लड़ती रही एक लौ
लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...
-
दो दिन पहले ही मैंने अपनी टिकट करवाई थी | आबू-रोड मे माँ का ऑपरेशन होना था ,आज होली का दिन था १० बज चुके थे मैं निकला स्टेशन क लिए मगर आज...
-
वो मुफलिसी का दौर था नियति कही अन्दर गहराई में दफन थी कभी कभी दिल बहलाने के लिए जिन्दगी से गुफ्तगू किया करता था मैं कहता था तारे तोड़ना ...
-
हमी थे वो शक्श जिसने मंदिर में नमाज पढ़ी थी हमी थे वो शक्श जिसने मज्जिद में पूजा की थी बेशक न रिवाज हो ये दुनिया का जिससे मैं वाकिफ नहीं ...

Supperb yaar. Maja aa gaya.
जवाब देंहटाएंmast likhne laga hoon naa aajkal
जवाब देंहटाएं