न जाने किसने लिक्खी हैं जो ऐसी तकदीर मिली ,
जब जब शंख बजाई है तब तब मैंने अजान सुनी .
जब जब शंख बजाई है तब तब मैंने अजान सुनी .
लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...
jis din mandir ki ghanti se swar mil gaya ajaan ka,
जवाब देंहटाएंrup badal jayega usdin mere hindustan ka,
kya baat hain...
जवाब देंहटाएं