बेवफा तेरी एक हँसी पर मेरी जान जाती थी,
आज तेरी जान जा रही हैं और मुझको हँसी आ रही हैं
आज तेरी जान जा रही हैं और मुझको हँसी आ रही हैं
लड़ती रही एक लौ अँधेरे से ये सोच कर की मैं सही हूँ रह रह कर वो देती एक चुनौती और बीच बीच में वो खिड़की के बहार देखती की आ जाये कोई मसीहा हौसल...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें